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छत्तीसगढ़ में आदिवासी वोटों की नैय्या पर चार और हुए दल सवार

By Mantralayanews :10-10-2018 07:54


रायपुर। आदिवासी वोटों को लेकर भाजपा और कांग्रेस में हमेशा खींचतान मची रहती है। इसका कारण यह है कि आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ में किसी भी राजनीतिक दल को सत्ता में आने के लिए आदिवासी वोटों को साधना बहुत जरूरी है। 90 में से 29 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।

प्रदेश में आदिवासियों की आबादी लगभग 72 लाख है। 29 सीट के अलावा कई और सीटों पर भी आदिवासियों का प्रभाव है। दोनों प्रमुख दलों के आदिवासी वोटों के समीकरण को गड़बड़ाने के लिए चार और पार्टियां तैयार खड़ी हैं। मतलब, अब आदिवासी वोटों की नैय्या पर छह दल सवार हो चुके हैं। जाहिर सी बात है, ऐसी स्थिति में भाजपा-कांग्रेस के लिए आदिवासी सीटों पर चुनौती कड़ी हो गई है।

18 पर कांग्रेस व 11 पर भाजपा का कब्जा

कांग्रेस का वोट बैंक अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति ही रहा है, लेकिन भाजपा इसमें सेंध लगाने में सफल रही है। अभी अनुसूचित जनजाति आरक्षित 18 सीटों पर कांग्रेस और 11 में भाजपा का कब्जा है। अब अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वोट का विभाजन हो गया है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट ज्यादा है, इसलिए इन सीटों पर मुकाबला कड़ा होता है।

शाह से लेकर मोदी तक का फोकस

भाजपा और कांगेस का आदिवासी सीटों पर विशेष फोकस है। भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तक आदिवासी इलाकों में सभाएं कर चुके हैं। संगठन के राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री सौदान सिंह ने खुद बस्तर और सरगुजा की आदिवासी सीटों का दौरा कर रणनीति बनाई है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने लोक सुराज यात्रा से लेकर विकास यात्रा तक की शुरुआत आदिवासी इलाकों से की।
 

Source:Agency