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Bhopal Gas Tragedy-दुकान में लगाए मुआवजे के 25 हजार,वही पाल रही परिवार

By Mantralayanews :03-12-2018 08:55


भोपाल। गैस त्रासदी के बाद मुआवजे में मिले 25 हजार रुपए ज्यादातर पीड़ितों को इलाज में कम पड़ गए। लेकिन, कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जिन्होंने उसी 25 हजार रुपए का कुछ हिस्सा छोटे-मोटे व्यापार में लगा दिया था। आज वही व्यापार उन परिवारों का सहारा बन चुके हैं।

भोपाल के जेपी नगर में रहने वाले पप्पू उर्फ भगवानदास साहू के परिवार में 7 सदस्य हैं। इन सदस्यों का पूरा खर्च एक किराना दुकान से होने वाली आवक से चलता है। यह वहीं दुकान है जो मुआवजे में मिले 25 हजार रुपए से खड़ी की थी। दूसरी तरफ सैकड़ों परिवार ऐसे भी हैं, जिनके पास आज मुआवजे की फूटी कौड़ी भी नहीं है। वे बताते हैं, जो राशि मिली थी वह त्रासदी के दिए जख्मों के इलाज में सालों पहले खत्म हो गई। अब कर्ज लेकर इलाज करा रहे हैं। परिवार कैसे पाल रहे हैं हम ही जानते हैं। हमें न तो रोजगार मिला और न ही रोजगार के अन्य कोई साधन, जिससे परिवार पाल सकें।

बेटा व पति को खोकर संघर्ष कर रहीं साजिद

यूनियन कार्बाइड कारखाने के कारण अपना सबकुछ खो देने वाले कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो आज दमखम से जीवन जी रहे हैं। ऐसी ही कहानी भोपाल के देवकी नगर में 64 साल की साजिदा बानो की है। उन्होंने 25 दिसंबर 1981 को अपने पति मोहम्मद अशरफ खान को खोया था। अशरफ फैक्ट्री में फीटर थे जो एक हादसे का शिकार हुए थे। 2-3 दिसंबर की गैस त्रासदी में साजिदा बानो ने अपने बेटे अरशद को खो दिया था। अब्दुल जब्बार कहते हैं कि साजिदा बानो जैसी महिलाओं की कहानी पीड़ितों के लिए संघर्ष करने की ऊर्जा देती हैं।

राशि का बड़ा हिस्सा इलाज में खर्च

39 साल के पप्पू साहू बताते हैं कि मेरा परिवार गैस त्रासदी झेल चुका है। इसके बदले मेरे पिता सेवाराम साहू और मुझे 25-25 हजार रुपए मुआवजा मिला था। इस राशि का बड़ा हिस्सा इलाज में चला गया, जो बचा था वह किराना दुकान में लगा दिया था। इस दुकान से उन्हें आज हर माह का खर्च निकालकर 7 से 8 हजार रुपए बच जाते हैं। इस राशि से परिवार के 7 सदस्यों का खर्च चल रहा है।

परिवार को समेटने में हुआ खर्च

72 साल के नवाब खां कहते हैं कि त्रासदी में 50 हजार रुपए मिले थे, यह राशि उजड़े हुए परिवार को समेटने में खर्च हो गई, फिर भी पत्नी और बेटे को नहीं बचा सका। अब उस राशि का एक पैसा भी नहीं है। जिंदगी गुजार रहा हूं बस।

Source:Agency