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हाथियों ने धान के बोरे को फुटबॉल की तरह खेलकर बिखेर दिया धान

By Mantralayanews :06-12-2018 07:51


महासमुंद। ग्राम पंचायत अचानकपुर के आश्रित ग्राम खड़उपार में करीब 14 हाथियों का दल चार दिसंबर की रात करीब 10 बजे आ धमका। यहां किसान सुखऊ दीवान के खलिहान में रखे करीब 50 कट्टा धान को फुटबॉल की तरह खेलकर बिखेर दिया और पेटभर खाने के बाद ग्राम खिरसाली की ओर बढ़ गए। खिरसाली में किसान अगर सिंग दीवान के खलिहान में रखे धान को भी बिखेर-खाकर नुकसान पहुंचाया। खलिहान में काम करने के दौरान ही हाथियों के धमकने के बाद किसान डर गए हैं।

सिरपुर अंचल के हाथी प्रभावित 42 गांव के किसानों की परेशानी कम नहीं हो रही है। आए दिन हाथियों का दल रिहायशी क्षेत्र में पहुंचकर उत्पात मचा रहे हैं। खलिहान में रखे धान और स्वयं की सुरक्षा को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।

मिली जानकारी के अनुसार खड़उपार में चार दिसंबर की रात करीब 10 बजे सुखऊ दीवान के खलिहान में थ्रेशर से धान मिंजाई कर रहे थे। इस बीच करीब 14 हाथियों का दल चिंघाड़ते हुए गांव से लगे खलिहान में पहुंचा और स्टेक कर रखे हुए 50 कट्टा धान को फुटबॉल की तरह खेलकर बिखेर दिया।

इसके बाद पेट भर खाया भी, जिससे किसान को भारी नुकसान हुआ है। थ्रेशर से मिंजाई कर रहे किसानों ने हाथियों के दल को देखकर हो-हल्ला मचाया। इसके बाद हाथियों का दल ग्राम खिरसाली की ओर बढ़ गए। खिरसाली स्थित खलिहान में भी पहुंचकर जमकर उत्पात मचाने की खबर है। इसके बाद हाथियों का दल खिरसाली के बांस प्लाट के आसपास डेरा जमाए है।

हाथियों के बिखेरने के बाद मिक्स हो गया धान

किसान सुखऊ दीवान ने बताया कि हाथियों के बिखेरने के बाद सरना और 1001 वैरायटी का धान मिक्स हो गया है। उन्हें इससे बहुत नुकसान झेलना पड़ेगा।

हाथियों के पुनः धमकने की अंदेशा से गांव में दहशत

ग्राम खड़उपार, अचानकपुर, खिरसाली, बंदोरा, फुसेराडीह के ग्रामीण हाथियों के धमकने की अंदेशा से दहशत में आ गए हैं। 4 दिसंबर की रात हाथियों के खलिहान में पहुंचकर नुकसान पहुंचाने की खबर मिलने के बाद ग्रामीण डर गए हैं। हाथियों के डर का असर पांच दिसंबर को देखने को मिला। शाम छह बजे के बाद ही खलिहान के साथ ही गांव की गलियां सूनसान हो गई। लोग घरों में दुबक गए।

लहंगर के पास हैं तीन हाथी

हाथी भगाओ फसल बचाओ समिति के संयोजक राधेलाल सिन्हा ने बताया कि पांच दिसंबर की शाम सात बजे तक तीन दंतैल हाथी लहंगर के पास जंगल में देखे गए हैं, जो शाम करीब पांच बजे ही जंगल से सड़क पर निकल आए थे, जिसे देखकर राहगीर डर गए और आगे बढ़ने से रुकना भला समझे और हाथियों के पुनः जंगल की ओर जाते तक रुके रहे। जब हाथी जंगल की ओर चले गए तो राहगीर गंतव्य की ओर बढ़े।
 

Source:Agency