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Bhopal- कलेजे पर पत्थर रखकर बच्चों को जंजीरों से बांधकर रखती है ये मां

By Mantralayanews :06-12-2018 08:06


मंडीदीप। धरती पर भगवान का दूसरा रूप होती है मां। जन्म देने से लेकर उसके लालन-पालन में कोई कसर नहीं छोड़ती। मगर मंडीदीप में एक ऐसी लाचार मां भी है, जो अपने जिगर के टुकड़ों को जंजीरों से बांधकर रखती है। ये अभागिन मां किसी दुर्भावना से नहीं बल्कि अपनी औलाद की खातिर ही ऐसा करने को मजबूर है।

इस मां के दो बेटे मानसिक रूप से दिव्यांग हैं। उनकी सुरक्षा की खातिर इस मां को ऐसा कदम उठाना पड़ रहा है। यह दर्दभरी कहानी नगर के वार्ड 17 सतलापुर निवासी देवी प्रजापति की है। उनकी तीन बेटे और एक बेटी है। दो बेटे भगवती शरण और जगदंबिका शरण मानसिक दिव्यांग हैं। इन्हें खुला रखना खतरे से खाली नहीं है। इनके पिता दयाराम प्रजापति जिगर के टुकड़ों को शासन की दिव्यांग के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने 5 साल तक दर-दर भटके। अंत में थक हार कर वे इस दुनिया को ही अलविदा कह गए, लेकिन दोनों बच्चों को किसी योजना का लाभ नहीं दिला सके।

पांच साल पहले बच्चों के सिर से पिता का साया छिनने के बाद अब इनकी जिम्मेदारी बूढ़ी मां और छोटे बेटे अंबिका के कंधों पर है। मां और बेटा दोनों भाइयों को लेकर दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अधिकारी कह रहे है कि दोनों बच्चे अब ओवरऐज (14 साल से अधिक उम्र के) हो गए हैं। अब इन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। हालांकि अभी अंबिका ने हिम्मत नहीं हारी है और वह भाइयों को सरकारी सहायता दिलाने का भरसक प्रयास कर रहा है।

सीएमओ से संपर्क कर लिया जा सकता है लाभ

दिव्यांगों के लिए देशभर में अलग-अलग तरह की 10-12 योजनाएं हैं। इनमें से एक पेंशन योजना भी है। इसके लिए नगरीय क्षेत्र में सीएमओ से संपर्क कर लाभ लिया जा सकता है। जिन बच्चों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है उनकी जानकारी लेकर उचित कार्यवाही करेंगे।

-पंकज जैन, उपसंचालक, सामाजिक न्याय विभाग, रायसेन

230 दिव्यांगों को नहीं मिल रहा लाभ

सतलापुर के ही प्रेमनारायण साहू की 7 साल की प्रियंका एवं 5 वर्ष की पिंकी दिव्यांग हैं। वार्ड-15 निवासी संगीता का 8 साल का बेटा मूक बधिर है, तो भारत सिंह लोधी की 5 साल की महक के हाथ-पैर काम नहीं करते हैं। ब्लाक में इन जैसे 230 दिव्यांग बच्चे और हैं, जिन्हें शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। केंद्र व राज्य शासन द्वारा इनके उत्थान के लिए ढेरों योजनाएं संचालित तो की जा रही हैं, लेकिन उनका लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा।

प्रेम नारायण और संगीता का कहना है कि गरीबी व जानकारी के अभाव में हम बच्चों को जरूरी शिक्षा भी नहीं दिलवा पा रहे हैं। भटकने के बाद भी योजना का लाभ हमें नहीं मिल पा रहा है।

अफसरों की अनदेखी के शिकार हैं दिव्यांग

नि:शक्त बच्चों के भविष्य को संवारने वाली केंद्र सरकार की इन्क्लूसिव एजुकेशन फॉर डिसएबल्ड एंड सेकंडरी स्टेज (आईईडीएसएस) योजना अफसरों की अनदेखी की शिकार है। इसका खामियाजा दिव्यांग बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। विभाग द्वारा आईईडीएसएस योजना के तहत ब्लाक के करीब 200 से अधिक दिव्यांग बच्चों को स्कूल में दाखिला तो दिलवा दिया, लेकिन उनके रहने के लिए विशेष सेल, खाने और पढ़ाई का खर्च नहीं दिलाया गया। इससे बच्चों की पढ़ाई पूरी नहीं हो पाई।
 

Source:Agency