Breaking News

Today Click 833

Total Click 4158178

Date 23-03-19

नक्सलियों से शांति वार्ता करने को तैयार ये महाराज

By Mantralayanews :31-12-2018 08:45


रायपुर। मुझे मौत से कोई भय नहीं है। यदि नक्सलियों से बातचीत करके छत्तीसगढ़ में शांति का माहौल बनाया जा सकता है तो मैं नक्सलियों से मिलने के लिए तैयार हूं। सरकार यदि किसी तरह की चर्चा की योजना बनाएं और मुझसे आगे आने को कहे तो मैं पीछे नहीं हटूंगा।

साधु-संतों को भी देश हित के लिए सलाह देनी चाहिए। यदि नेतागण साधु-संतों से विचार विमर्श करते हैं और साधु-संत सलाह देते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है। धर्म-राजनीति के बीच समन्वय होना चाहिए। पानी में यदि चीनी मिलाएं तभी शर्बत बनता है। यदि कोई साधु किसी नेतागण से मिलकर राज्य और देश हित की बात करता है तो इसमें गलत कुछ नहीं है। यह कहना है वृंदावन से आए सद्गुरु रितेश्वर महाराज का।

युवाओं को देना है कृष्ण-राधा नाम का संदेश

बातचीत में रितेश्वर महाराज ने कहा कि नए साल की शुरुआत सनातन संस्कृति की परंपरा और भारतीय संस्कारों से की जानी चाहिए। पाश्चात्य संस्कृति के फेर में फूहड़ डांस, शराब, मौजमस्ती से युवा दिग्भ्रमित हो रहे हैं।

युवाओं को संस्कारों से जोड़ने के लिए वे हर साल 31 दिसंबर से 5 जनवरी तक देश में कहीं न कहीं रहकर कृष्ण-राधा नाम का संदेश देते हैं। उम्मीद है कि इस बार छत्तीसगढ़ के हजारों युवा पं.दीनदयाल ऑडिटोरियम में श्रीकृष्ण लीला पर आयोजित कार्यक्रम में आएंगे। युवाओं को तनावमुक्त रहने के सूत्र बांटना है।

छत्तीसगढ़ में हो शराबबंदी

छत्तीसगढ़ में शराब बंदी हो इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से अनुरोध करूंगा। राजस्व प्राप्त करना बड़ी चीज नहीं है। सबसे बड़ी चीज चरित्र, परिवार है। शराब से हजारों घर बर्बाद होते हैं। यदि शराबबंदी हो जाए तो छत्तीसगढ़ में खुशहाली छा जाएगी।

भूपेश बघेल जुझारू और डॉ. रमन सरल

मैं किसी पार्टी का पक्षधर नहीं हूं। सभी नेताओं से मेरे अच्छे संबंध हैं। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह सरल व्यक्तित्व वाले और वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जुझारू प्रवृत्ति के हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के लिए काफी अच्छा कार्य कर रहे हैं और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी सरल और बेहतर इन्सान है।

राम मंदिर राजनीति में उलझा

अयोध्या की पहचान भगवान श्रीराम से है। अयोध्या में मंदिर नहीं बनेगा तो और कहां बनेगा। अन्य समुदाय के लोग भी आपसी बातचीत से मामला सुलझा सकते हैं लेकिन मंदिर का मामला राजनीति में उलझ गया है।
 

Source:Agency