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गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने वाला बिल राज्‍यसभा से भी पास

By Mantralayanews :10-01-2019 07:46


केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने ‘संविधान (124 वां संशोधन) , 2019' विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि यह विधेयक अमीरी और गरीबी की खाई को कम करेगा. इससे लाखों परिवारों को फायदा मिलेगा. इससे सबको फायदा होगा चाहे वह किसी वर्ग या धर्म के हों. उन्होंने विधेयक को नरेन्द्र मोदी सरकार के लक्ष्य ‘सबका साथ, सबका विकास' की दिशा में अहम कदम करार दिया. 
चर्चा का जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि बहुत सारे सदस्यों ने आशंका जताई है कि 50 फीसदी आरक्षण की सीमा है तो यह कैसे होगा? जो पहले के फैसले किये गये वो संवैधानिक प्रावधान के बिना हुए थे. मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की नीति और नीयत अच्छी है. इसलिए संविधान में प्रावधान करने के बाद हम आरक्षण देने का काम करेंगे.
कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने सरकार पर सवाल उठाया और पूछा, बिल को जेपीसी और सिलेक्ट कमिटी के पास क्यों नहीं भेजा गया, अगर जूडिशल कमिटी के पास यह मामला गया तो आप क्या करेंगे.
उन्‍होंने मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा, बिल के माध्‍यम से चुनावों की वजह से ही एक वर्ग को साधने की कोशिश की गयी है. उन्‍होंने सरकार से पूछा, 50 फीसदी की सीमा से कैसे निपटा जाएगा यह साफ किया जाना चाहिए.
बीएसपी के सतीश चंद्र मिश्र ने कहा, बीएसपी अध्यक्ष मायावती कई बार कह चुकी हैं कि सवर्ण वर्ग के गरीबों को आरक्षण मिलना चाहिए, इसलिए हम इस बिल का समर्थन करते हैं. बिल का समर्थन करने के बाद बीएसपी सांसद ने सरकार पर सवाल उठाया. उन्‍होंने कहा, नौकरियां हैं नहीं, पहले से आरक्षित श्रेणी के लोगों को नौकरी अब दे नहीं रहे हैं. अब इस नये आरक्षण वर्ग को 'करोड़ों' नौकरियां कहां से देंगे. सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा, कानून केवल छलावे को तौर पर चुनाव की वजह से आखिरी वक्त पर लाया गया है.
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा, आज जब बिना किसी कोटा में छेड़छाड़ किए ऊंची जाति के गरीब लोगों को आरक्षण दिया जा रहा है तो कुछ लोगों के पेट में दर्द हो रहा. 
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा, पहले 50% तक की आरक्षण की सीमा थी, लेकिन संवैधानिक संशोधन के बाद यह सीमा खत्म हो जाएगी. अब कोर्ट में इसके संवैधानिक होने की वजह दिक्कत नहीं आएगी.
कपिल सिब्‍बल ने कहा, हम चाहते थे कि इस बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजा जाता और तब चर्चा होती. उसके बाद पारित किया जाता. एक तरफ 2.5 लाख कमाने वाले को इनकम टैक्स देना पड़ता है और दूसरी ओर आप 8 लाख कमाने वाले को गरीब बता रहे हैं. आप इनकम टैक्स लिमिट को भी 8 लाख कर दीजिए.
कांग्रेस सांसद कपिल सिब्‍बल ने आरक्षण बिल पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया और कहा, आरक्षण बिल लाने से पहले आपने कोई डेटा जमा किया. राज्‍यों में ओबीसी, अन्य जातियों का प्रतिशत क्या है. उन्‍होंने कहा, सरकार हमें बताये कि क्या इस पर कोई रिपोर्ट बनी, 8 लाख का मापदंड कैसे तय किया गया.
उन्‍होंने बिल को देर से लाने पर भी सरकार को घेरा और कहा, बिल को सरकार चुनावी नफा नुकसान के हिसाब से लाया. जब लोगों के पास सरकारी नौकरियां ही नहीं है तो 10 फीसदी सवर्ण आरक्षण किसलिए. उन्‍होंने कहा, सरकार लोगों को बेवकूफ बना रही है. जितनी नयी नौकरियां मिली हैं, उससे ज्यादा नौकरियां छीनी गई हैं.

Source:Agency