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क्या हैं वो कारण जो प्रियंका को चुनाव में खुलकर नहीं उतरने दे रहे?

By Mantralayanews :14-03-2019 07:37


कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक और जनसभा के लिए सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, ज्योतिरादित्य समेत कई नेता गुजरात पहुंचे। बैठक के बाद रैली में प्रियंका गांधी का भाषण तय नहीं था। प्रियंका गांधी ने अपने संबोधन के दौरान मंच से यह स्वीकार भी किया। उन्होंने कहा कि मैं तो मीटिंग में आई थी। मुझे लगा नहीं था कि भाषण देने की जरुरत होगी। लेकिन मैं पहली बार गुजरात आई हूं, तो दो बातें जरुर करूंगी। इतना कहते ही तालियों की गड़गड़ाहट से अडालज का मैदान गूंज उठा। हालांकि राहुल गांधी की अपेक्षा उन्हें काफी कम समय दिया गया।
आखिर ऐसा क्यों है कि 
कांग्रेस को मजबूती देेने की क्षमता रखने वाली प्रियंका सक्रिय राजनीति में आने के बावजूद बहुत सक्रिय नहीं दिखाई देती हैं?
भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की ताबड़तोड़ रैलियों के बाद भी कांग्रेस की चुनावी रैलियों में उनकी मौजूदगी लगभग नहीं के बराबर है?
पार्टी में महासचिव पद और देश के सबसे बड़े राज्य की आधे से ज्यादा सीटों की जिम्मेदारी के बावजूद वह अपेक्षाकृत कम चर्चा में हैं?
एक मूल वजह तो साफ दिखती है कि कांग्रेस राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समकक्ष खड़ा करने की कोशिश में है। दूसरी वजह ये हो सकती है कि पार्टी 2024 के लिए प्रियंका को ट्रंप कार्ड के तौर पर बचा कर रखना चाहती है। 2019 में पूरी तरह प्रियंका को झोंकने का कांग्रेस को फिलहाल ज्यादा फायदा नहीं दिखता। लेकिन इसके अलावा भी कई और कारण हैं कि प्रियंका की राजनीति पर्दे के पीछे ज्यादा है और फ्रंट पर उनकी मौजूदगी कम रहती है। 
'बड़ी पॉलिटिकल एंट्री, पहला रोड शो और दो शब्द भी नहीं बोलीं'
एक लंबे इंतजार के बाद प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में आईं, तो उन्हें कांग्रेस का ट्रंप कार्ड कहा जाने लगा। विरोधी पार्टियां खुलकर भले ही प्रियंका की मजबूती को स्वीकार न करें, लेकिन भाजपा जैसी बड़ी पार्टी भी मानती है कि प्रियंका के आने से कांग्रेस मजबूत हुई है। कथित मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले में पूछताछ के लिए ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा को तलब किया हो और ऐसी विपरीत परिस्थिति के बीच प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में आईं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने न केवल उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया, बल्कि उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्य की आधे से ज्यादा लोकसभा सीटों की जिम्मेदारी भी सौंप दी।

उत्तर प्रदेश में जहां पिछले चुनावों तक प्रियंका, अमेठी और रायबरेली में अपने भाई राहुल गांधी और मां सोनिया गांधी के लिए प्रचार करती रही थीं, अब उसी उत्तर प्रदेश की 41 सीटों की चुनावी कमान प्रियंका के हाथ में है। पिछले दिनों जब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस का रोड शो हुआ, तो राहुल-प्रियंका की अगुवाई में कांग्रेस के चुनावी अभियान का ऐतिहासिक आगाज हुआ। रोड शो के समापन पर प्रियंका गांधी के संबोधन के लिए समर्थक इंतजार करते रहे, लेकिन वह दो शब्द भी नहीं बोलीं। वहीं, राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस भी की और कार्यकर्ताओं से मुखातिब भी हुए। ये प्रियंका के भाषण का इंतजार कर रहे लोगों के लिए काफी चौंकाने वाला पल था।

Source:Agency