अशोकनगर । नगरीय निकाय चुनाव में अब 2 दिन ही शेष बचे हैं। शहर में बिजली, पानी, सडक़, स्वच्छता, पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का अब भी अभाव है, लेकिन यह मुद्दे चुनाव से गायब हैं।
इस बार अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होने जा रहा है और किसी भी दल से अभी अध्यक्ष पद के दावेदार का नाम ही स्पष्ट नहीं किया गया है। सिर्फ राजनीतिक कयास ही लगाए जा रहे हैं। यह भी तय है कि कोई पार्षद दल से ही चुना जाएगा।
लेकिन अभी प्रचार में जो वादे और दावे चल रहे हैं वे सिर्फ वार्ड तक ही सीमित हैं। उम्मीदवार पिछले सालों में वार्ड में किए गए खुद के काम गिना रहे हैं। वहीं कुछ वार्ड तो ऐसे हैं, जहां पूर्व में पार्षद रहे प्रत्याशियों द्वारा वार्ड विकास का कोई काम ही नहीं कराया है।
कोरोना काल के चलते करीब 7 साल तक पार्षद पद पर रहने के बाद भी वार्ड का विकास कराने में असफल रहे पार्षद अब विकास छोड़ अब पार्टी के नाम, रिश्ते-नाते और आपसी संबंध के साथ ही वार्ड का निवासी होने जैसी बातो को आगे रखकर वोट मांग रहे हैं। इसके बीच विकास की बात ही नहीं की जा रही है।
कई जगह विरोध:
पिछली बार वार्ड की जनता ने जिन प्रत्याशियों को अपना नेता चुनकर विकास की आस लगाई थी। उनमें कुछ प्रत्याशी ऐसे भी हैं जिन्होने पार्षद बनने के बाद अपने वार्डवासियों का हालचाल जानना भी मुनासिब नहीं समझा। जिससे उनके कार्यकाल में वार्ड में न तो कोई विकास कार्य हुआ और न ही वार्ड के लोगो को बुनियादी समस्याओं से निजात मिल पाई।
लेकिन वह एक बार फिर चुनाव मैदान में नजर आ रहे हैं ऐसे में अब जब वे पार्षद पद के प्रत्याशी जनता के बीच वोट मांगने जा रहे हैं तो जनता अपनी समस्याएं गिना रही है। कई जगहों पर उम्मीदवारों को विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। मतदान को लेकर कई जगहों पर विरोध भी खुलकर सामने आ चुका है। एक के बाद एक कालोनियों में रहवासियों ने प्रदर्शन कर स्पष्ट किया है कि पहले समस्या सुलझाओ, उसके बाद वोट मांगने आओ।
यह हैं शहर के मुद्दे:
सफाई व्यवस्था- सफाई व्यवस्था के लिए नगर पालिका के पास अच्छा खासा अमला है। एक सैकड़ा से अधिक सफाईकर्मी और करीब दर्जन भर कचरा कलेक्शन वाहन होने के बाद भी सफाई व्यवस्था फेल नजर आती है। नियमित रूप से कचरा नहीं उठाया जा रहा है। शहर की एक भी कालोनी ऐसी नहीं है जिसे कचरा मुक्त कहा जा सके। पिछले बार के स्वच्छ सर्वेक्षण में भी शहर की परफार्मेंस खराब रही थी। कचरा कलेक्शन और उसके निपटान की व्यवस्था भी समुचित नहीं है। हेल्पलाइन बनाने से लेकर रात्रि की सफाई व्यवस्था भी लागू की, लेकिन इसे क्रियांवित ही नहीं किया गया।
यातायात व्यवस्था: शहर की यातायात व्यवस्था भी समुचित नहीं है। इसका मुख्य कारण है कि कहीं भी नगर पालिका की पार्किंग नहीं है। पार्किंग न होने की वजह से बाजारों में अव्यवस्थित तरीके से वाहन खड़े होते हैं। स्टेशन रोड पर भी बैंकों और कई दुकानों ने आगे तक पार्किंग कर रखी है जो यातायात को बाधित करती है। अस्पताल रोड के साथ मुख्य बाजार में भी पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। शहर की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने किसी प्रत्याशी ने कोई दावा या उपाय प्रचार में नहीं सुझाया है।
अवैध कालोनियां- शहर में नगर पालिका द्वारा ही चिन्हित कई अवैध कालोनियां हैं। इसके बाद भी धड़ल्ले से अवैध कालोनियां काटी जा रही हैं। इनमें कालोनाइजर सुविधाएं नहीं देता है और बाद में जनता के दबाव में नगर पालिका को ही व्यवस्था करना पड़ती है। जिस कालोनी से टैक्स के रूप में नपा को आय होना चाहिए, वहां उल्टा राशि व्यय करना पड़ती है। कालोनी में हरियाली के लिए जगह भी नहीं छोड़ी जाती है। यदि वैध कालोनियां बनें तो इससे न सिर्फ नगर पालिका की आय बढ़ेगी, बल्कि शहर में हरियाली बढ़ेगी और शहर का विकास भी व्यवस्थित तरीके से होगा।