सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को पूजा स्थल कानून (विशेष प्रावधानों,1991) से जुड़ी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करेगा। इसमें मांग है- सुप्रीम कोर्ट अदालतों को पूजा स्थल के मूल धार्मिक चरित्र का पता लगाने के लिए आदेश देने की परमिशन दे।
याचिका में पूजा स्थल कानून (विशेष प्रावधानों,1991) की धारा 4(2) को चुनौती दी गई है। जो किसी स्थान (मंदिर-मंदिर या दूसरे धार्मिक स्थल) के धार्मिक चरित्र को बदलने की कार्यवाही पर रोक लगाती है। साथ ही इसको लेकर नए मामले दायर करने पर भी रोक लगाती है।
आज की सुनवाई CJI संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच करेगी। इससे पहले 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने पूजा स्थल कानून से जुड़ी 7 याचिकाओं पर सुनवाई टाली दी थी।
कोर्ट ने कहा था कि मामला 3 जजों की बेंच सुन रही है, जबकि आज 2 जजों की बेंच बैठी है। अब नई तारीख पर सुनवाई होगी। अप्रैल में सुनवाई होगी। साथ ही कोर्ट ने इस मामले पर नई याचिका स्वीकार करने से भी मना कर दिया था।
पूजा स्थल कानून (विशेष प्रावधानों,1991) के मुताबिक, 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता।
7वीं याचिका असदुद्दीन ओवैसी की
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी की याचिका पर भी सुनवाई होनी है। उनकी याचिका को पहले से पेंडिंग 6 याचिकाओं के साथ जोड़ा गया है। ओवैसी ने याचिका में 1991 के प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट (पूजा स्थल कानून) को लागू करने की मांग की है।
प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट (विशेष प्रावधानों) 1991 की 6 धाराओं की वैधता पर दाखिल याचिकाओं पर चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने आखिरी बार 12 दिसंबर 2024 को सुनवाई की थी।
12 दिसंबर 2024: SC ने कहा था- उचित होगा कि बाकी सभी अदालतें अपने हाथ रोक लें
सुप्रीम कोर्ट की 3 मेंबर वाली बेंच ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट (विशेष प्रावधानों) 1991 की कुछ धाराओं की वैधता पर दाखिल याचिकाओं पर 12 दिसंबर को सुनवाई की थी। बेंच ने कहा था कि हम इस कानून के दायरे, उसकी शक्तियों और ढांचे को जांच रहे हैं। ऐसे में यही उचित होगा कि बाकी सभी अदालतें अपने हाथ रोक लें।
सुनवाई के दौरान CJI संजीव खन्ना ने कहा था कि हमारे सामने 2 मामले हैं, मथुरा की शाही ईदगाह और वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद। तभी अदालत को बताया गया कि देश में ऐसे 18 से ज्यादा मामले लंबित हैं। इनमें से 10 मस्जिदों से जुड़े हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से याचिकाओं पर 4 हफ्ते में अपना पक्ष रखने को कहा था।
CJI संजीव खन्ना ने कहा था कि जब तक केंद्र जवाब नहीं दाखिल करता है हम सुनवाई नहीं कर सकते। हमारे अगले आदेश तक ऐसा कोई नया केस दाखिल ना किया जाए।