रेसलर को तो दे दी मौत महिला फुटबॉलरों का क्या होगा? एशियन चैंपियनशिप में नहीं गाया था ईरान का राष्ट्रगान, कल ही लौटीं स्वदेश
Updated on
20-03-2026 01:14 PM
तेहरान: ईरान में एक तरफ 19 वर्षीय पहलवान को मौत की सजा दी गई है, तो दूसरी तरफ उन महिला फुटबॉलरों की सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया की सांसें अटकी हुई हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बगावत की हिम्मत दिखाई थी। ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर खेले गए एएफसी महिला एशियाई कप में हिस्सा लेने के बाद ईरानी टीम स्वदेश लौट आई है, लेकिन उनके भविष्य पर अनिश्चितता के काले बादल मंडरा रहे हैं।
राष्ट्रगान पर खामोशी और गद्दारी के आरोप
ऑस्ट्रेलिया में दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच के दौरान ईरानी महिला टीम की 26 सदस्यों ने राष्ट्रगान के समय चुप रहकर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इसे ईरान सरकार के खिलाफ विरोध के प्रतीक के रूप में देखा गया। हालांकि, अगले ही मैच में खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान गाया और सैल्यूट भी किया, जिससे इन चर्चाओं को बल मिला कि उन पर और उनके परिवारों पर दबाव बनाया गया था। ईरान के सरकारी मीडिया ने शुरुआत में इस खामोशी को देशद्रोह और युद्ध काल की गद्दार करार दिया था।
दो खिलाड़ियों ने ली शरण, बाकी लौटीं वतन
पूरी टीम में से दो खिलाड़ियों ने सुरक्षा कारणों से ऑस्ट्रेलिया में ही राजनीतिक शरण (Asylum) मांग ली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील के बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इन खिलाड़ियों को मानवीय वीजा जारी किया है, जिससे वे 12 महीने वहां रह सकेंगी और स्थायी निवास के लिए आवेदन कर सकेंगी। ब्रिस्बेन रोर जैसे ए-लीग क्लब के साथ इन खिलाड़ियों की बिना हिजाब के ट्रेनिंग करते हुए तस्वीरें वायरल हुई हैं, जो ईरान की सख्त पाबंदियों के खिलाफ उनकी आजादी का संकेत हैं। बताया जा रहा है कि शुरुआत में सात खिलाड़ियों ने शरण मांगी थी, लेकिन पांच ने आखिरी वक्त पर फैसला बदल लिया। संदेह जताया जा रहा है कि ईरान सरकार ने उनके परिवारों के जरिए उन्हें मजबूर किया।
सीमा पर भव्य स्वागत या खतरे की आहट?
ईरान-तुर्की सीमा पर टीम का फूलों और लाल कालीन के साथ स्वागत किया गया। ईरान फुटबॉल महासंघ के प्रमुख ने खिलाड़ियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके साहस को मर्दाना ताकत जैसा बताया। तेहरान के वलीअसर स्क्वायर पर भी बड़े स्वागत समारोह की योजना बनाई गई है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह स्वागत केवल दुनिया को दिखाने के लिए एक प्रोपोगंडा हो सकता है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, सीमा के उस पार इन लड़कियों के साथ क्या होगा, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है।
सालेह मोहम्मदी की फांसी के बाद बढ़ा डर
चूंकि हाल ही में पहलवान सालेह मोहम्मदी को विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले में फांसी दी गई है, इसलिए मानवाधिकार संगठनों को डर है कि इन फुटबॉलरों को भी स्वदेश लौटने पर गुप्त रूप से प्रताड़ित किया जा सकता है। ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने कुछ खिलाड़ियों की वापसी को अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप की परियोजना की अपमानजनक विफलता करार दिया है, जो इस मामले के राजनीतिकरण को दर्शाता है।
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