रूसी तेल का दुश्मन है अमेरिका, ईरान युद्ध के बीच भारत को क्यों दे दी खरीद की इजाजत, सामने आई मंशा
Updated on
07-03-2026 12:31 PM
नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में टेंशन है। इसने इंटरनेशनल ऑयल मार्केट में हलचल पैदा कर दी है। इस बीच अमेरिका ने अचानक भारत को रूसी तेल खरीदने की इजाजत दे दी। इसके लिए 30 दिन की छूट मिली है। अब अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने इसके पीछे की मंशा बताई है। ABC न्यूज के साथ इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि अमेरिका ने तेल की कीमतें कम रखने में मदद के लिए शॉर्ट टर्म उपाय लागू किए हैं। इसके तहत वह चाहता है कि भारत जल्दी से तेल लेकर उसे रिफाइन करके मार्केट में लाए। अमेरिका का यह रुख इसलिए भी अहम है क्योंकि अब तक वह रूसी तेल का दुश्मन रहा है। रूसी तेल खरीदने के लिए उसने भारत पर एक्स्ट्रा 25% भी टैरिफ लगाया था।
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भरोसा दिलाया कि ईरान युद्ध के बीच गैस की कीमतों में बढ़ोतरी टेम्पररी है। इंटरव्यू के एक हिस्से को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया।
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री ने क्या बताया?
क्रिस राइट ने कहा-
हमने तेल की कीमतें कम रखने में मदद के लिए शॉर्ट टर्म उपाय लागू किए हैं।
हम भारत में अपने दोस्तों को पहले से जहाजों पर मौजूद तेल लेने, उसे रिफाइन करने और उन बैरल को जल्दी से मार्केट में लाने की इजाजत दे रहे हैं।
सप्लाई फ्लो और प्रेशर कम करने का यह एक प्रैक्टिकल तरीका है।
भारत के सामने कोई दिक्कत नहीं
इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम एशिया में चल रही जियोपॉलिटिकल अस्थिरता के बावजूद भारत को एनर्जी की कमी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। उन्होंने कच्चे तेल (क्रूड) की सप्लाई में संभावित रुकावटों को लेकर चिंताओं पर यह बात कही।
पुरी ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों के लिए सस्ता और सस्टेनेबल फ्यूल देना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एनर्जी इंपोर्ट बिना रुके जारी है। कंज्यूमर्स को फ्यूल की उपलब्धता या कीमतों में उतार-चढ़ाव के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है।
केंद्रीय मंत्री की यह प्रतिक्रिया बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और सप्लाई सिक्योरिटी को लेकर इंडस्ट्री की अटकलों के बाद आई है।
पश्चिम एशिया में भारी अस्थिरता
पश्चिम एशिया में हाल की अस्थिरता ने कच्चे तेल के फ्लो पर दुनिया भर का ध्यान खींचा है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तनाव बना हुआ है।
हालांकि, न्यूज एजेंसी एएनआई को सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत की मौजूदा तेल, पेट्रोलियम प्रोडक्ट और LPG सप्लाई की स्थिति 'बहुत आरामदायक स्थिति' में है। अधिकारियों ने कहा कि बाहरी जोखिमों के सामने भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने में प्रोएक्टिव उपायों और अलग-अलग सोर्सिंग ने मदद की है।
अमेरिका ने दी है 30 दिन की छूट
अमेरिका ने गुरुवार को भारत को रूसी क्रूड ऑयल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी है। कारण है कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष ने दुनिया भर में एनर्जी सप्लाई में रुकावट डाली है। इसने तेल की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।
इस उथल-पुथल के बीच तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 8.51% या 6.35 डॉलर बढ़कर 81.01 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यह मई 2020 के बाद से एक दिन में इसकी सबसे बड़ी बढ़त है। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4.93% या 4.01 डॉलर बढ़कर 85.41 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
रूसी तेल खरीदने की इजाजत देने से सप्लाई की चिंताएं कम हो सकती हैं। खासकर ग्लोबल रिफाइनिंग में भारत की अहम भूमिका को देखते हुए। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का पांचवां सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है। हालांकि, शुक्रवार को तेल की कीमतें थोड़ी कम हुईं। इसमें ब्रेंट और WTI 1% से ज्यादा गिरकर 84.42 डॉलर और 79.92 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए।
भारत की क्रूड इंपोर्ट स्ट्रैटेजी
भारत दुनिया भर में तीसरा सबसे बड़ा तेल इंपोर्टर भी है। हाल के महीनों में रूसी क्रूड से हटकर यह मिडिल ईस्ट के सप्लायरों की ओर जा रहा था। लेकिन, 2022 के बाद से भारत की क्रूड इंपोर्ट स्ट्रैटेजी में काफी बदलाव आया है। रूस से इंपोर्ट तेजी से बढ़ा है। फरवरी के डेटा से पता चलता है कि भारत के क्रूड इंपोर्ट का लगभग 20% मॉस्को से होता है। यह लगभग 10.4 लाख बैरल प्रति दिन है। इस डाइवर्सिफिकेशन का मकसद किसी एक इलाके में रुकावटों की संभावना को कम करना है।
सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने भी सोशल मीडिया पर फ्यूल की कमी की अफवाहों पर जवाब दिया। ऐसे दावों को 'बेबुनियाद' बताया। कंपनी ने कहा कि इन्वेंट्री का लेवल काफी है। डिस्ट्रीब्यूशन चैनल सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
इंडियन ऑयल ने लोगों से अपील की कि वे घबराएं नहीं या फ्यूल स्टेशनों पर भीड़ न लगाएं। लोगों को सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की सलाह दी।
लगातार सप्लाई को सपोर्ट करने के लिए अधिकारियों ने कहा कि सभी बड़ी रिफाइनरियों और LPG प्रोडक्शन यूनिट्स को आउटपुट बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। यह एक मिलकर किया गया काम है ताकि देश भर में उपलब्धता को मजबूत किया जा सके। भारत को इंटरनेशनल सप्लाई में रुकावटों से बचाना इसका मकसद है।
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